कबीर दास के 10 दोहे हिंदी में।
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कबीर दास के 10 दोहे हिंदी में।

कबीर दास के १० दोहे हिंदी में। – Kabir das ke dus dohe Hindi mein – 10 couplets of Kabir Das in Hindi.

नमस्कार मित्रों आज हम आपको कबीर दास के कुछ ऐसे दोहे बताने वाले है जिन्हे आपने आज से पहले कभी नहीं पढ़ा होगा। तो यदि आपको कबीर जी के दोहे पढ़ना पसंद है तो जरूर पढ़े यह सभी संत कबीर दास द्वारा ही लिखे गए है जो की एक महान लेखक थे इसलिए यह दोहे सभी के बीच बहुत लोकप्रिय है।

कबीर दास के 10 दोहे।

  1. “कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ जो कुल को हेत। साधुपनो जाने नहीं, नाम बाप को लेत।”
  2. “जैसा भोजन खाइये, तैसा ही मन होय। जैसा पानी पीजिये, तैसी बानी सोय।”
  3. “कबीर तहाँ न जाइये, जहाँ सिध्द को गाँव। स्वामी कहै न बैठना, फिर-फिर पूछै नाँव।”
  4. “इष्ट मिले अरु मन मिले, मिले सकल रस रीति। कहैं कबीर तहँ जाइये, यह सन्तन की प्रीति।”
  5. कबीरा ते नर अंध हैं, गुरू को कहते और, हरि रुठे गुरु ठौर है, गुरू रुठे नहीं ठौर!
  6. “गारी ही से उपजै, कलह कष्ट औ मीच। हारि चले सो सन्त है, लागि मरै सो नीच।”
  7. “बहते को मत बहन दो, कर गहि एचहु ठौर। कह्यो सुन्यो मानै नहीं, शब्द कहो दुइ और।”
  8. “तिनका कबहूँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय, कबहूँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।”
  9. “माला फेरत जुग भया, फिरा न मन का फेर, कर का मनका डार दे, मन का मनका फेर।”
  10. “दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त, अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत।”

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