किसी अपरिचित व्यक्ति द्वारा आपकी गुमी हुई पुस्तकों के प्राप्त होने पर धन्यवाद दीजिए - Give thanks for receiving your lost books by a stranger.
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अपरिचित व्यक्ति द्वारा आपकी गुमी हुई पुस्तकों के प्राप्त होने पर धन्यवाद पत्र।

किसी अपरिचित व्यक्ति द्वारा आपकी गुमी हुई पुस्तकों के प्राप्त होने पर धन्यवाद दीजिए – Give thanks for receiving your lost books by a stranger.

अपरिचित व्यक्ति द्वारा आपकी गुमी हुई पुस्तकों के प्राप्त होने पर धन्यवाद पत्र।

जी०टी० रोड,
मुरादाबाद
श्रीराम महोदय,
सप्रेम नमस्ते
आपके नौकर द्वारा मेरी पुस्तकें और आपका लिखा पत्र मिल गए हैं। श्रीमान् जी, मैं किस मुख से आपका धन्यवाद करूँ ? आपने इतना सौजन्य दिखाकर मुझे सदा के लिए अपना ऋणी बना दिया है। मैं कल पार्क में बैठा अपने साथियों से बातचीत करता हुआ उन्हीं के साथ चल दिया और अपनी पुस्तकों का थैला पार्क में ही भूल गया था। घर आने पर मुझे थैले की याद आई। मैं फिर पार्क में गया और ढूँढ़ने पर भी पुस्तकें न प्राप्त कर सका।
भगवान का धन्यवाद है कि वे पुस्तकें आप जैसे सज्जन के हाथ में आईं; जिन्होंने पुस्तकों से मेरा नाम और पतापढ़कर मुझे भेज दीं; अन्यथा सैकड़ों रुपयों की हानि हो जाती। मैं पुनः हृदय से धन्यवाद करता हूँ।
भवदीय
कृष्णा

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