श्री राम स्तुति आरती - Shri Ram Stuti aarti.
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श्री राम स्तुति आरती – Shri Ram Stuti aarti.

श्री राम स्तुति आरती(Shri Ram Stuti aarti) – श्री राम स्तुति हिंदू पौराणिक कथाओं में सबसे प्रतिष्ठित देवताओं में से एक, भगवान राम को समर्पित एक शक्तिशाली स्तुति है। महाकाव्य रामायण के रचयिता, ऋषि वाल्मिकी द्वारा रचित, यह भजन भगवान राम की महिमा, गुणों और दिव्य गुणों को समाहित करता है। यह भगवान की स्तुति करने और उनका आशीर्वाद पाने के साधन के रूप में कार्य करता है, और इसका जाप सदियों से भक्तों द्वारा किया जाता रहा है।

वाल्मिकी ने लगभग 500 ईसा पूर्व रामायण लिखी थी, जो हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ माना जाता है। रामायण भगवान राम की यात्रा, बुराई पर उनकी विजय और उनकी पत्नी सीता के साथ उनके अंतिम पुनर्मिलन की कहानी बताती है। श्री राम स्तुति भगवान राम के प्रति वाल्मिकी की प्रशंसा और भक्ति के प्रतिबिंब के रूप में कार्य करती है, और यह भगवान राम से जुड़ी धार्मिक प्रथाओं और अनुष्ठानों का एक अभिन्न अंग बन गई है।

श्री राम स्तुति – Shri Ram Stuti

॥दोहा॥
श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन
हरण भवभय दारुणं ।
नव कंज लोचन कंज मुख
कर कंज पद कंजारुणं ॥१॥

कन्दर्प अगणित अमित छवि
नव नील नीरद सुन्दरं ।
पटपीत मानहुँ तडित रुचि शुचि
नोमि जनक सुतावरं ॥२॥

भजु दीनबन्धु दिनेश दानव
दैत्य वंश निकन्दनं ।
रघुनन्द आनन्द कन्द कोशल
चन्द दशरथ नन्दनं ॥३॥

शिर मुकुट कुंडल तिलक
चारु उदारु अङ्ग विभूषणं ।
आजानु भुज शर चाप धर
संग्राम जित खरदूषणं ॥४॥

इति वदति तुलसीदास शंकर
शेष मुनि मन रंजनं ।
मम् हृदय कंज निवास कुरु
कामादि खलदल गंजनं ॥५॥

मन जाहि राच्यो मिलहि सो
वर सहज सुन्दर सांवरो ।
करुणा निधान सुजान शील
स्नेह जानत रावरो ॥६॥

एहि भांति गौरी असीस सुन सिय
सहित हिय हरषित अली।
तुलसी भवानिहि पूजी पुनि-पुनि
मुदित मन मन्दिर चली ॥७॥

॥सोरठा॥
जानी गौरी अनुकूल सिय
हिय हरषु न जाइ कहि ।
मंजुल मंगल मूल वाम
अङ्ग फरकन लगे।
रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास

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